सीढ़ियाँ


पनघट की सीढ़ियों, के किनारे बैठा रहा, सदियाँ निकलती रहीं, इंतज़ार बढ़ता रहा| वो आती थी पानी भरने, कभी मंद-मंद मुस्काती भी थी, पानी बढ़ता घटता रहा, इंतज़ार बढ़ता रहा| […]

Read Article →

माँ


पहले कभी जब थक जाते थे, तुम हल्के हाथों से थपथपा कर, कभी हाथ फेर कर चेहरे पर, कभी कहानियाँ सुना कर, किसी धुँधलाते समय की छिपती यादों में लोरियाँ […]

Read Article →

चड्डी-मैन


रात होगी चारों तरफ और उल्लू चिल्लाएँगे, डर का माहौल होगा, आम लोग थर्राएंगे|| ऐसी अँधेरी रातों में, एक अजूबा आएगा| अँधेरे से बचाने को, चड्डी पहन के आएगा|| चेहरे […]

Read Article →

राख


काली-सफेद पर्तें छोड्ती हुई, और पर्तों के नीचे पर्तों से घिरी हुई, परत दर परत खुलती, फिर अचानक बिखरती हुई, उस जलती सिगरेट के अंदर जले हैं कई राज, कभी […]

Read Article →