चड्डी-मैन

रात होगी चारों तरफ और उल्लू चिल्लाएँगे,
डर का माहौल होगा, आम लोग थर्राएंगे||

ऐसी अँधेरी रातों में,
एक अजूबा आएगा|
अँधेरे से बचाने को,
चड्डी पहन के आएगा||

चेहरे पर मुखौटा,
और पीठ पे उड़ती चादर|
पैंट के ऊपर चड्डी,
पायेगा सबका आदर||

इमारतों की छतों पर,
कूद-फांद करेगा वो|
नकाबपोश बदमाशों की
चड्डी साफ करेगा वो||

अंधे की लाठी बनेगा वो,
रखेगा कानून का हिसाब|
हर मज़बूर लाचार को,
मिलेगा चड्डी का इंसाफ||

चड्डी चड्डी चड्डी चड्डी||

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